राष्ट्रीय ओलमा कौंन्सिल की ज़रूर क्यों?
अपनी क़यादत, अपनी ताक़त
लखमापुर गॉव थाना खेतासराय के 3 छोटे बच्चे खालिद, अरबाज व क़ादिर घर का चाकू तेज कराने के लिए खेतासराय बाजार लाये थे,कि पुलिस ने उनको पकड़ लिया,और शाम से थाने में बंद रखा मामला उनके घर वालो के जरिये राष्ट्रीय ओलमा कौंन्सिल के पास आता है,जिसके बाद हर बार की तरह पार्टी के आला पदधिकारीगण हरकत में आते है थानाध्यक्ष महोदय खेतासराय व क्षेत्राधिकारी शाहगंज से सम्पर्क करने के बाद अभी रात्रि 10:15 बजे बच्चे छोड़ दिये जाते है,जिनकी औलाद छूटी क्या वह दुआ नही देंगे और क्या चाहिए आज़मगढ़ व जौनपुर की अवाम से पूंछना है क्या कोई और आप के वक़्त पर खड़ा होता है अच्छे या खराब हो राष्ट्रीय ओलमा कौंन्सिल के लोग लेकिन जब भी ज़रूरत पड़ी है तो क्या पार्टी के लीडर आप के वक़्त पर खड़े नही हुए है क्या क़ुरबानी लेना चाहते है कितना इम्तेहान लेंगे आप,जब देखे तो मौलाना साहब रशादी साहब में ही सारी कमियां निकाली जाती है माना गलती होती है फरिस्ते नही है इंसान है लेकिन इतना इम्तेहान आखिर क्यों कब आप एतेबार करेंगे और कितना आजमाएंगे।
अल्लाह के वास्ते दूसरों का झंडा उठाने के बजाय अपना झंडा उठाये, अपनी क़यादत मजबूत करें जो रात हो या दिन हर वक़्त आप वक़्त पर खड़ी रहती हो,


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