क्या होती है स्मॉर्ट पॉलिटिक्स?
नोट: पूरा पढ़ कर तब प्रतिक्रिया दें आधा पढ़ेंगे नहीं समझ पाएँगे
मजलिस की भीड़ का पूरा क्रेडिट प्रदेश अध्यक्ष ने ले लिया क्यूँकि ये भीड़ किसी जलसे को संबोधित करती तो ज़्यादा असर होता या ओवैसी साहब अपने गोंद लिए गाँव संजर चले जाते फ़र्ज़ी एंकाउंटर मे शहीद हुए लोगों के परिजनों से मिल लेते या सीएए एनआरसी में बंद लोगों के परिजनों से मिल लेते , एक राष्ट्रीय चर्चित नेता प्रदेश के अपने पहले दौरे जहाँ से उसको चुनाव लड़ना है वहाँ सिर्फ़ 2 जगह खाना खा कर वापस हो जाए ये उस भीड़ और अवाम की मोहब्बत का मज़ाक़ है या प्रदेश अध्यक्ष उनको मुक़ामी बातों हालातों से सही तरह से आवगत नहीं कराते, शौक़त साहब अपनी वाहवाही करने के लिए ओवैसी साहब को अपने घर बुलवाए दर असल ये शौकत साहब खुद नहीं चाहते कि जिले व प्रदेश में कोई उनके ऊपर जाए इस का सबूत यूपी में मजलिस की नीव रखने वाले कलीम जामई खुद हैं जिन्हें एक साज़िश के तेहत पार्टी से निकाल दिया गया और भी चेहरे हैं जो जो यूपी में पार्टी से निकाले गए हैं जिन्होंने मजलिस को यूपी में लाने और घर घर तक पहुँचाने में दिन रात एक किए थे और लोग भी निकाले जाएँगे जो लोग उभरने (यानी ज़्यादा उछलने ) की कोशिश करेंगे तो, दर असल इसे “स्मॉर्टपॉलिटिक्स” कहते हैं इसमें होता ये है कि प्रदेश अध्यक्ष अपने कार्यकर्ताओं की पूरी इन्फ़र्मेशन अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को नहीं देता अगर कोई युवा नेता ज़िला स्तरीय नेता कोई अच्छा काम करता है जिससे वो मसीहा बन सकता हो और प्रदेश स्तर पर चर्चे में आता हो तो प्रदेश अध्यक्ष वो बात को राष्ट्रीय कमेटी तक सही तरीक़े से पेश नहीं करता उलटा बुराई करता है कि ये मनमानी कर रहा है पार्टी का नुक़सान होगा वग़ैरह वग़ैरह इससे वो उभरता हुआ युवा नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष की नज़र में गिर जाता है
दरअसल यही वाली सियासत महाराष्ट्र में अबू आसिम आज़मी भी कर चुके हैं 2000 के आस पास जब मुंबई मे समाजवादी का उरूज था उसवक़्त कई बड़े चेहरे समाजवादी से जीत कर आए थे मौजूदा मंत्री नवाब मलिक , पूर्व एमएलए यूसुफ़ अब्रहनी पूर्व एमएलए बसीर मूसा पटेल पूर्व एमएलए सुहेल लोखंडवाला एडवोकेट मजीद मेमन ,मंत्री असलम शेख़ और फिर उभरते हुए चेहरे अशरफ़ आज़मी और अरशद आज़मी ये सब समाजवादी की ही देन हैं समाजवादी मुंबई से इन चेहरों ने पहचान पाई और जब ज़्यादा चर्चित होने लगे तो कोई ना कोई बहाना बना कर इनको पार्टी से बाहर किया गया और कई लोग मजबूर हो कर खुद पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टियों में चले गए
सियासत का ये खेल बहोत पुराना है लेकिन पार्टी में जो हाईकमान होते हैं उन्हें उभरते चेहरों को पहचानना होगा और पार्टी के शिखर पर हमेशा बने रहने वाले अपने नेताओं पर भी नज़र रखनी होगी वरना हर दौर में उभरती हुई युवा लीडरशिप का क़त्ल होता रहेगा
यूपी मजलिस अपने उरूज पर है असदुद्दीन ओवैसी को अपने ज़िला स्तर के छोटे छोटे कार्यकर्ताओं से खुद डायरेक्ट संपर्क में रहना चाहिए क्यूँकि इससे अगर कोई सलाहियत वाला चेहरा होगा तो उभर कर आएगा ना कि पार्टी के सीनियर नेताओं की तअससुब का शिकार होजाए।
अली अशहद आज़मी

Right sir
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