Breaking

Friday, 13 March 2020

क्या जो बात NPR पर गृहमंत्री सदन में बोले हैं उन बातों पर वो सुप्रीमकोर्ट में हलफ नामा लिख कर देंगे?

क्या जो बात NPR पर गृहमंत्री सदन में बोले हैं उन बातों पर वो सुप्रीमकोर्ट में हलफ नामा लिख कर देंगे?

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी के नाम के सामने D यानि दाऊटफुल नहीं लगेगा मतलब एनपीआर के आधार पर किसी को डाउटफुल सिटीजन नहीं बनाया जाएगा और ना ही CAA के माध्यम से किसी की नागरिकता ली जाएगी। सवाल यह है कि जिस गृहमंत्री ने CAA NRC और एनपीआर पर पिछले तीन महीने में बार बार बयान बदले हों आज उनकी बात पर यकीन किस आधार पर किया जाए? इसी सदन में कुछ दिनों पहले उन्होंने क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा था कि पहले CAA आएगा फिर NRC और NPR आएगा और उस पर एक इंच भी पीछे न हटने की बात लाखों करोड़ों लोगों से वादा करते हुए कहा था जिस पर उनके समर्थको ने खूब तालियां भी बजायी थीं और बगलें भी।एक रास्ता यह है कि जो बात गृहमंत्री सदन में बोल रहे हैं उन बातों पर वो सुप्रीमकोर्ट में हलफ नामा लिख कर दें ताकि अगर कल को वो फिर अपने बयान से बदलते हैं तो सुप्रीमकोर्ट में उन्हें चैलेंज किया जा सके, क्योंकि पार्लियामेंट में दिए गए बयान को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता है जब तक कि वो कोर्ट को लिख कर न दें या सदन में कानून न बनाएं।
दूसरी बात यह कि गृहमंत्री ने विपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद को इस मुद्दे पर बात करने के लिए चैलेजिंग तरीके से आमंत्रित किया है तो तमाम विपक्षी पार्टियों की तरफ से और साथ में इस मुद्दे पर जितने भी सामाजिक संगठन काम कर रहे हैं उनके प्रतिनिधि को साथ लेकर पूरी तय्यारी से उनसे मिलें। ये अच्छा मौका है कि बात चीत के ज़रिए इस मसले को संविधानिक तरीके से हल किया जा सके।

मैं समझता हूं इस मुद्दे पर सरकार पूरी तरह बैकफुट पर है। सरकार के लिए CAA छछुंदर की तरह गले में अटक गई है न उगला जा रहा है न निगला जा रहा है।

कानून वापस लेने का प्रावधान हमारे संविधान में है कोर्ट भी किसी कानून को निरस्त्र करने का अधिकार रखती है ऐसे में CAA विरोधी दलों को एक जुट होकर पूरी तैयारी के साथ गृहमंत्री से मिलना चाहिए और फिर कोर्ट में एक साथ जाना चाहिए। पहले कानून तर्क वितर्क और बात चीत से सरकार को मात दें उसके बाद सड़कें हैं धरने प्रदर्शन हैं और जनता की बड़ी अदालतें हैं जहां सरकारों पर लगाम लगाई जाती रही हैं।
अब्दुल निज़ामी
(लेखक हिन्द न्यूज़ के ग्रुप एडिटर हैं)

No comments:

Post a Comment