आज़मगढ़, राष्ट्रीय ओलमा कौंन्सिल के तत्वाधान में 19 सितम्बर को बटला हाउस फ़र्ज़ी इन्काउन्टर पर केजरीवाल का घर घेरने के एलान के बाद कुछ अपने लोग है जिनके पेट मे सेकुलरिज्म का दर्द बहुत जोरो से हो रहा है और अवाम में गुमराह कुन बाते फैलाने में लगे हुए है कि प्रधानमंत्री या गृहमंत्री का घर घेरना चाहिए बेचारा केजरीवाल का घर घेर रहे है वह क्या कर सकता है वह मासूम है,उसके हाथ मे क्या है,वह तो चाहता है लेकिन भाजपा सरकार से मजबूर है ,बेचारा केजरीवाल के हाथ मे दिल्ली पुलिस नही है ,बेचारा केजरीवाल कैसे जांच करा सकता है, तरह तरह के सवाल सामने लाकर खड़ा किया जारहा है,मैं उन सभी लोगो से पूछना चाहता हु 2015 चुनाव से पहले केजरीवाल ने 2 वादे किये थी सरकार बनती है तो 84 के सिख दंगो पर SIT बना कर जांच कराएंगे व बटला हाउस पर SIT बनाएंगे,केजरिवाल की सरकार बन गयी,केजरीवाल ने 2015 में सिख दंगो की SIT गठित कर जांच के आदेश दे दिया,लेकिन आज तक बटला हाउस पर SIT नही बनाई और अब तो बटला हाउस भूल गए और क्या पड़ी है
केजरीवाल को जब क़ौम के कुछ लोग जाँच के लिए आंदोलन कर रहे हों और वही पर कुछ लोग केजरीवाल को खुश करने के लिए पूरे आंदोलन को गलत ठहरा रहे हो तो क्या पड़ी है उनको की आप के माथे पर लगे कलन की जांच कराए,मेरी ऐसे लोगो से गुज़ारिश है कि आप आंदोलन के हिस्सा नही बन सकते,आप हमारे साथ नही चल सकते ,आप न चले लेकिन अल्लाह के वास्ते अवाम में गुमराही न फैलाये,साथ न दे, तो कम से कम कमी भी न निकाले, इस दौर में घर मे बैठने वालो से कही ज्यादा बेहतर है वह लोग जो अपने हकूक के लिए सड़को पर अपनी आवाज बुलन्द कर रहे है।


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