हम चुनाव हारे हैं हौसला नहीं, हार की करेंगे समिक्षा
2020 के जिला पंचायत चुनाव मे नये हौसले के साथ लेंगे हिस्सा:अशरफ इस्लाही राष्ट्रीय ओलेमा कौन्सिल
आज़मगढ़,राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल एक पार्टी के साथ साथ एक तहरीक व एक मिशन है। जब 2008 मे आजमगढ़ व आस पास मे ज़ुल्म के पहाड़ तोड़े गये, हर तरफ डर व खौफ का माहौल था, रिश्तेदार रिश्तेदार का नही था ऐसे हालात मे कौंसिल का जन्म हुआ था। जिसका मक्सद अवाम को डर से बाहर लाना, देश भर मे इंसाफ कायम करना, खुशहाली लाना और अधिकारों से वंचित जनता को उनका अधिकार दिला कर खुशहाल देश की तामीर करना है।
10 वर्षों से राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल बराबर ज़ुल्म के विरुध मज़लूमों की आवाज़ बन कर कार्य कर रही है और आगे भी इन्शा अल्लाह करती रहेगी। इन दस वर्षों मे पार्टी मे कई उतार चढ़ाओ आये, मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी की हिम्मत,जुर्रत और साबित कदमी और मज़लूम व बेसहारा माओं बहनों व बुजुर्गो की दुआओं की बिना पर कौंसिल पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ता गया, रात हो या दिन एक आवाज़ पर हाज़िर हुये और शीशा पिलाई दिवार बनकर हमेशा खड़े रहे। कई चुनाव आये जिस मे हालात की नजाकत को देखते हुये शुरूआती चुनाव मे आवाम ने बहुत हद तक साथ दिया और कौंसिल ने कामियाबी भी हासिल की। मगर हालात बदलने के साथ ही अवाम फिर तथाकथित पार्टियों की गुलामी को स्वीकार करने लगे और कौंसिल अपने कार्यकर्ताओं को लेकर आज तक जालिम का मुकाबला करती चली आरही है। चुनाव मे हार जीत तो अल्लाह के हाथ मे है वह जिसे चाहता है सत्ता देता है और जिस से चाहता है सत्ता छीन लेता है।
2019 के चुनाव मे एक तरफ सपा बसपा ने यूपी मे ठगबंधन कर अवाम खास कर मुसलमानों को ठगने का काम किया। कौंसिल ने इन पार्टियों से गठबंधन मे मुसलमानों की भी हिस्सेदारी की बात की मगर यह पार्टियां सिर्फ मुसलमानों का वोट लेना चाहती हैं हिस्सेदारी देना नही। आखिर कौंसिल ने कुछ सीटों पर प्रत्याशी उतार कर चुनाव मे हिस्सा लिया। कई बार मुख्यमंत्री रहने वालों के गठबंधन को जब नाकामी मिली और जब देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले हार गये, कौंसिल तो अभी एक नन्हा सा पौदा है। फिर भी हजारों अवाम ने कौंसिल पर भरोसा किया और वोट देकर अपनी क्यादत व अपनी सेयासत पर ज़ोर दिया, हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं। सभी कार्यकरताओं, पदाधिकारियों का भी शुक्रिया अदा करते हैं जिनहों ने इस गर्मी मे वक्त निकाल कर मेहनत किया और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के संदेश व पार्टी के मिशन को घर घर तक पहुंचाया।
हम चुनाव हारे हैं हौसला नही, हार की मिल बैठ कर समिक्षा करेंगे, कमियों को दूर कर एक नये हौसले के साथ 2020 के जिलापंचायत चुनाव के लिये पूरी मज़बूती के साथ मैदान मे आयेंगे और एक नया इतिहास रचेंगे। इन्शा अल्लाह
हम झुके नही, हम बिके नही, हम थके नही।
2020 के जिला पंचायत चुनाव मे नये हौसले के साथ लेंगे हिस्सा:अशरफ इस्लाही राष्ट्रीय ओलेमा कौन्सिल
आज़मगढ़,राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल एक पार्टी के साथ साथ एक तहरीक व एक मिशन है। जब 2008 मे आजमगढ़ व आस पास मे ज़ुल्म के पहाड़ तोड़े गये, हर तरफ डर व खौफ का माहौल था, रिश्तेदार रिश्तेदार का नही था ऐसे हालात मे कौंसिल का जन्म हुआ था। जिसका मक्सद अवाम को डर से बाहर लाना, देश भर मे इंसाफ कायम करना, खुशहाली लाना और अधिकारों से वंचित जनता को उनका अधिकार दिला कर खुशहाल देश की तामीर करना है।
10 वर्षों से राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल बराबर ज़ुल्म के विरुध मज़लूमों की आवाज़ बन कर कार्य कर रही है और आगे भी इन्शा अल्लाह करती रहेगी। इन दस वर्षों मे पार्टी मे कई उतार चढ़ाओ आये, मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी की हिम्मत,जुर्रत और साबित कदमी और मज़लूम व बेसहारा माओं बहनों व बुजुर्गो की दुआओं की बिना पर कौंसिल पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ता गया, रात हो या दिन एक आवाज़ पर हाज़िर हुये और शीशा पिलाई दिवार बनकर हमेशा खड़े रहे। कई चुनाव आये जिस मे हालात की नजाकत को देखते हुये शुरूआती चुनाव मे आवाम ने बहुत हद तक साथ दिया और कौंसिल ने कामियाबी भी हासिल की। मगर हालात बदलने के साथ ही अवाम फिर तथाकथित पार्टियों की गुलामी को स्वीकार करने लगे और कौंसिल अपने कार्यकर्ताओं को लेकर आज तक जालिम का मुकाबला करती चली आरही है। चुनाव मे हार जीत तो अल्लाह के हाथ मे है वह जिसे चाहता है सत्ता देता है और जिस से चाहता है सत्ता छीन लेता है।
2019 के चुनाव मे एक तरफ सपा बसपा ने यूपी मे ठगबंधन कर अवाम खास कर मुसलमानों को ठगने का काम किया। कौंसिल ने इन पार्टियों से गठबंधन मे मुसलमानों की भी हिस्सेदारी की बात की मगर यह पार्टियां सिर्फ मुसलमानों का वोट लेना चाहती हैं हिस्सेदारी देना नही। आखिर कौंसिल ने कुछ सीटों पर प्रत्याशी उतार कर चुनाव मे हिस्सा लिया। कई बार मुख्यमंत्री रहने वालों के गठबंधन को जब नाकामी मिली और जब देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले हार गये, कौंसिल तो अभी एक नन्हा सा पौदा है। फिर भी हजारों अवाम ने कौंसिल पर भरोसा किया और वोट देकर अपनी क्यादत व अपनी सेयासत पर ज़ोर दिया, हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं। सभी कार्यकरताओं, पदाधिकारियों का भी शुक्रिया अदा करते हैं जिनहों ने इस गर्मी मे वक्त निकाल कर मेहनत किया और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के संदेश व पार्टी के मिशन को घर घर तक पहुंचाया।
हम चुनाव हारे हैं हौसला नही, हार की मिल बैठ कर समिक्षा करेंगे, कमियों को दूर कर एक नये हौसले के साथ 2020 के जिलापंचायत चुनाव के लिये पूरी मज़बूती के साथ मैदान मे आयेंगे और एक नया इतिहास रचेंगे। इन्शा अल्लाह
हम झुके नही, हम बिके नही, हम थके नही।
तौफीक़ जहां तक हो खिदमत करो ऐ लोगों
इन्सानों की खिदमत का इनाम खुदा देगा।
अशरफ़ इस्लाही
राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल

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