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Tuesday, 25 August 2020

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई साहब ने 2006 में अपने साथ खड़े बदरुद्दीन अजमल को पहचानने से इनकार कर दिया था

    • न हमसफ़र, न हमनशीं से निकलेगा,
  • हमारे पांव का कांटा हमी से निकलेगा।

आज़मगढ़, अपनी क़यादत, अपनी सियासत ज़रूरी क्यों है वो इस खबर से समझिए, अपने अधिकारों और हुक़ूक़ को लोकतंत्र में मुख्यधारा की राजनीति में शामिल और सत्ता का हिस्सा बनकर ही हासिल किया जा सकता है वरना गुलामी में सिर्फ खैरात मिलती है हक़ नही। कल तक असम में बदरुद्दीन अजमल साहब की पार्टी AIUDF को कांग्रेस ऑन रेकॉर्ड  भाजपा की BTeam बुलाया करती थी, आज उसी तथाकथित भाजपा की एजेंट पार्टी से गठबंधन कर रही है, तस्वीर में नज़र आ रहे असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई साहब ने 2006 में अपने साथ खड़े बदरुद्दीन अजमल को पहचानने से इनकार कर दिया था जबकि अजमल साहब उस वक़्त दो सीटों पर एक साथ MLA चुने गए थे उसी अजमल से 2019 लोकसभा चुनाव में तरुण गोगोई ने मिन्नत करके अपने बेटे के लिए अघोषित समर्थन हासिल किया था ताकि बेटा MP बन सके। इसलिए आज जो तथाकथित सेकुलर दल Rashtriya Ulama Council को भाजपा की BTeam कह रहे हैं वो कल आपको अपनी ATeam में शामिल होने का न्योता देते नजर आएंगे बस ज़मीन पर मेहनत करने की ज़रूरत है, लोगों के काम आना और लोगों के लिए काम करना है, आगे बढ़ना है बिना विरोध से डरे और संघर्ष करना है संविधान के लिए, सम्मान के लिए और सत्ता के लिए। 


जब अपना काफ़िला अज़्म ओ यकीन से निकलेगा, 
जहां से चाहेंगे रास्ता वहीं से निकलेगा,
वतन की मिट्टी मुझे एड़ियां रगड़ने दे,

मुझे यकीन है चश्मा वही से निकलेगा। 


तलहा आमिर रशादी

राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल उत्तर प्रदेश

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