क्या ग़म है अगर सारी खुदाई हो मुख़ालिफ़
काफ़ी है अगर एक ख़ुदा मेरे लिए है।
घर में क़ैद रहकर(क्रोना वायरस से बचाव ) अच्छा प्रयोग ऐसा लग रहा है जैसे रोज़े का महीना कुछ पहले आ गया बिना इफ्तारी। उधर जेल में हमारे मौलाना ताहिर मदनी साहब सुन्नते यूसुफ़ अलैहिस्सलाम अदा कर रहे हैं। देश बुरे दौर से गुज़र रहा है। सन् 2018 में एस आई ओ के कन्वेंशन से उनका मार्ग दर्शन करता प्रभावी भाषण जिसका कुछ अंश प्रस्तुत है। वास्तव में देश बुरे दौर से गुज़र रहा है किन्तु निराश होने की ज़रूरत नहीं है। आप सबके हाथों में इंसानियत का भविष्य है। अतः परिस्थितियां कैसी ही क्यों न हों हमें निराश बिल्कुल नहीं होना चाहिए। मुसलमानों आपकी हैसियत भलाई के लिए है आप सबके भले के लिए भेजे गये हैं सबकी खैर के लिए भेजे गए हैं।आपको सच्चाई की गवाही के लिए उठाया गया है।आपको चुना गया है आप चुने हुए लोगों में से हैं हमारा इस्लामी कैरेक्टर सबके सामने आना चाहिए। नैतिकता के अनुसार भलाई के अनुसार हमें अपना कैरेक्टर प्रस्तुत करना है देश की उन्नति देश को आगे बढ़ाने के लिए हमें भाग लेना है। हमें भलाई की दावत देना है। मानवता प्यासी है मानवता भटक रही है। अल्लाह का पैग़ाम हमारे पास है जो मानव की विपत्ति में मुक्ति का साधन है इसी प्रकाश को हमें फैलाना है। अल्लाह ने जीवन दिया क़ुरआन के द्वारा जीवन व्यतीत करने का तरीक़ा बताया है तरीक़ा अपनाये बिना यह जीवन व्यर्थ है। हमें शर्म आनी चाहिए कि सभी रिपोर्टों के अनुसार मुसलमान शिक्षा में सबसे पीछे है हमें शिक्षा में आगे बढ़ना है। क़ुरआन की पहली तालीम शिक्षा प्राप्त करना है। हमारा धर्म शिक्षा के महत्व को उजागर करता है। अशिक्षा कुफ्र तक पहुंचा देने वाली चीज़ है। अनाथों की सेवा करो।सेवा हमारी पहचान होनी चाहिए।हम गरीबों की मदद करने वाले लोग हैं असहायों की सहायता करने वाले लोग हैं। अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया मदद करो। अनाथों की सेवा करने वाला उनका ख़र्च उठाने वाला अन्तिम दिन (हिसाब वाले दिन) मेरे इतने निकट होगा जितने निकट मेरी दो उंगलियां हैं। विश्व के सभी लोग अल्लाह की मख़लूक़ हैं यह अल्लाह का परिवार है। जहां मुसलमान हो वहां उसका पड़ोसी भूखा नहीं रहना चाहिए। अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया उस व्यक्ति का ईमान पूर्ण नहीं हो सकता जिसका पड़ोसी भूखा रहे और वह पेट भर खाना खाए। आपका एजेंडा यह होना चाहिए कि आपका अस्पताल हो आपका अनाथालय हो। सेवा कार्य भरपूर किया जाए बिना भेदभाव के सहायता कीजिए मानवता के आधार पर सेवा भाव से सहायता कीजिए आपकी पहचान मानवता का दर्द रखने वाले की हैसियत से होनी चाहिए। सेवा भाव सबसे बढ़कर तो आपमें होना चाहिए। इसी प्रसंग में महिलाओं की जागरूकता बहुत आवश्यक है। महिलाओं के बिना कोई समुदाय आगे नहीं बढ़ सकता। सहाबा किराम के साथ उस समय महिलाओं का भी भरपूर सहयोग होता था। हमें मीडिया में भी भाग लेना चाहिए आजकल मीडिया की जंग है जो मीडिया में होगा वही अपनी बात आगे पहुंचा सकता है। आपको भी मीडिया में आना होगा।जिसके पास मीडिया होगा वह जंग पहले जीत जाएगा।हम यह चाहते हैं कि राजनीति में सबको साथ लेकर चला जाए बिना भेदभाव के।हर विभाग में आपको जाना होगा।अंत में यह कि आपका मददगार अल्लाह है।
क्या ग़म है अगर सारी खुदाई हो मुख़ालिफ़
काफ़ी है अगर एक ख़ुदा मेरे लिए है।
अनुवाद- डा० आफ़ताब अहमद
(मुजाहिद)
काफ़ी है अगर एक ख़ुदा मेरे लिए है।
घर में क़ैद रहकर(क्रोना वायरस से बचाव ) अच्छा प्रयोग ऐसा लग रहा है जैसे रोज़े का महीना कुछ पहले आ गया बिना इफ्तारी। उधर जेल में हमारे मौलाना ताहिर मदनी साहब सुन्नते यूसुफ़ अलैहिस्सलाम अदा कर रहे हैं। देश बुरे दौर से गुज़र रहा है। सन् 2018 में एस आई ओ के कन्वेंशन से उनका मार्ग दर्शन करता प्रभावी भाषण जिसका कुछ अंश प्रस्तुत है। वास्तव में देश बुरे दौर से गुज़र रहा है किन्तु निराश होने की ज़रूरत नहीं है। आप सबके हाथों में इंसानियत का भविष्य है। अतः परिस्थितियां कैसी ही क्यों न हों हमें निराश बिल्कुल नहीं होना चाहिए। मुसलमानों आपकी हैसियत भलाई के लिए है आप सबके भले के लिए भेजे गये हैं सबकी खैर के लिए भेजे गए हैं।आपको सच्चाई की गवाही के लिए उठाया गया है।आपको चुना गया है आप चुने हुए लोगों में से हैं हमारा इस्लामी कैरेक्टर सबके सामने आना चाहिए। नैतिकता के अनुसार भलाई के अनुसार हमें अपना कैरेक्टर प्रस्तुत करना है देश की उन्नति देश को आगे बढ़ाने के लिए हमें भाग लेना है। हमें भलाई की दावत देना है। मानवता प्यासी है मानवता भटक रही है। अल्लाह का पैग़ाम हमारे पास है जो मानव की विपत्ति में मुक्ति का साधन है इसी प्रकाश को हमें फैलाना है। अल्लाह ने जीवन दिया क़ुरआन के द्वारा जीवन व्यतीत करने का तरीक़ा बताया है तरीक़ा अपनाये बिना यह जीवन व्यर्थ है। हमें शर्म आनी चाहिए कि सभी रिपोर्टों के अनुसार मुसलमान शिक्षा में सबसे पीछे है हमें शिक्षा में आगे बढ़ना है। क़ुरआन की पहली तालीम शिक्षा प्राप्त करना है। हमारा धर्म शिक्षा के महत्व को उजागर करता है। अशिक्षा कुफ्र तक पहुंचा देने वाली चीज़ है। अनाथों की सेवा करो।सेवा हमारी पहचान होनी चाहिए।हम गरीबों की मदद करने वाले लोग हैं असहायों की सहायता करने वाले लोग हैं। अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया मदद करो। अनाथों की सेवा करने वाला उनका ख़र्च उठाने वाला अन्तिम दिन (हिसाब वाले दिन) मेरे इतने निकट होगा जितने निकट मेरी दो उंगलियां हैं। विश्व के सभी लोग अल्लाह की मख़लूक़ हैं यह अल्लाह का परिवार है। जहां मुसलमान हो वहां उसका पड़ोसी भूखा नहीं रहना चाहिए। अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया उस व्यक्ति का ईमान पूर्ण नहीं हो सकता जिसका पड़ोसी भूखा रहे और वह पेट भर खाना खाए। आपका एजेंडा यह होना चाहिए कि आपका अस्पताल हो आपका अनाथालय हो। सेवा कार्य भरपूर किया जाए बिना भेदभाव के सहायता कीजिए मानवता के आधार पर सेवा भाव से सहायता कीजिए आपकी पहचान मानवता का दर्द रखने वाले की हैसियत से होनी चाहिए। सेवा भाव सबसे बढ़कर तो आपमें होना चाहिए। इसी प्रसंग में महिलाओं की जागरूकता बहुत आवश्यक है। महिलाओं के बिना कोई समुदाय आगे नहीं बढ़ सकता। सहाबा किराम के साथ उस समय महिलाओं का भी भरपूर सहयोग होता था। हमें मीडिया में भी भाग लेना चाहिए आजकल मीडिया की जंग है जो मीडिया में होगा वही अपनी बात आगे पहुंचा सकता है। आपको भी मीडिया में आना होगा।जिसके पास मीडिया होगा वह जंग पहले जीत जाएगा।हम यह चाहते हैं कि राजनीति में सबको साथ लेकर चला जाए बिना भेदभाव के।हर विभाग में आपको जाना होगा।अंत में यह कि आपका मददगार अल्लाह है।
क्या ग़म है अगर सारी खुदाई हो मुख़ालिफ़
काफ़ी है अगर एक ख़ुदा मेरे लिए है।
अनुवाद- डा० आफ़ताब अहमद
(मुजाहिद)

No comments:
Post a Comment