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Monday, 14 October 2019

हम तो मिट जाएंगे अए अर्जे अलीगढ़ लेकिन, तुमको जिंदा रहना है क़यामत की सहर होने तक। हुजैफा आमिर AMUSU पूर्व सचिव

बड़ा दुश्मन बना फिरता है वो बच्चों से लड़ता है ।

मेरे अज़ीज़ अलीग साथियों,


कैम्पस के मौजूदा हालात से आप सब वाकिफ हैं कि किस तरह से तलबा में खौफ पैदा किया जा रहा है और AMU को तानाशाही और ज़िद से चलाया जा रहा है और लगातार तलबा का शोषण और उनके साथ ज़ुल्म किया जा रहा है। हमने जब इस तानाशाही के खिलाफ आवाज़ उठाई तो इन्तेज़ामिया ने हमारे कैरियर के साथ ही हमारी ज़िंदगी को भी दांव पर लगा दिया पर हमारा हौसला न टूटा और न टूटेगा इंशा अल्लाह क्योंकि हमे यकीन है कि हम हक़ पर हैं और स्टूडेंट लीडर होने के नाते हमारी ज़िम्मेदारी थी आवाज़ उठाना।

जिस इन्तेज़ामिया का फर्ज था कि वो हमें क्लास रूम और लाइब्रेरी भेजती उसने हमें 52 दिनों के लिए जेल भेज दिया पर इससे भी इनकी अना को तस्कीन नही हुई है। अब तो इन्होंने Ethics और नैतिकता की तमाम हदें पार कर दी हैं और हम स्टूडेंट्स को ऐसे टारगेट कर रहे हैं जैसे कोई निजी दुश्मन भी नही करता होगा। आखिर हमने ऐसी क्या गलती करदी की पूरी AMU इन्तेज़ामिया  मिलकर हमारे खिलाफ हर हरबा और साज़िश रचने में लगी है और हर तरह से हमे नुकसान पहुंचाने की कोशिश में मुब्तिला है। 7 मुक़दमों में हमे फंसा कर दिल नही भरा तो लगातार फिर कोशिश की जा रही है कि हम पर और मुक़दमे लिखवा कर हमें दोबारा जेल भेजवा दिया जाए ताकि कोई इनके खिलाफ डेमोक्रेटिक आवाज़ उठाने की सोच भी न सके। पर क्या इस डर से हक़ और सच बोलना भी छोड़ दें?

चुंगी गेट पर स्टूडेंट्स ने अपने जम्हूरी हक़ यूनियन इलेक्शन की डेट के लिए धरना लगाया है, मुझे तलबा ने उस धरने में बुलाया, AMUSU सेक्रेटरी होने के नाते और यूनियन का लाइफ मेम्बर होने के नाते ये मेरा फ़र्ज़ था कि मैं अपने साथियों के साथ खड़ा होता। मैं अपने तलबा साथियों की solidarity में धरना स्थल पहुंचा और उनके धरना को अपना नैतिक और लोकतांत्रिक समर्थन दिया। इस ज़ालिम इन्तेज़ामिया को ये तक बर्दाश्त नही की स्टूडेंट्स अपने हक़ की आवाज़ उठाएं और इसलिए मेरे खिलाफ फ़र्ज़ी मुक़दमा लिखवाने की तहरीर दे दी गयी जिसमे तलबा के इस धरने के खिलाफ भी कार्यवाही करने की बात कही गयी ताकि एक तरफ मुझसे बदला भी निकाला जा सके और साथ ही धरना दे रहे तलबा का हौसला भी तोड़ा जा सके और उन्हें भी डराया जा सके। हमारे हर democratic और peaceful प्रोटेस्ट को इन्तेज़ामिया जान बूझकर violent लिख कर AMU स्टूडेंट लीडर्स और यूनियन की छवि लगातार खराब करने की साज़िश कर रहे हैं ताकि कोई Alumni या  General Student या सिटिज़न इनके सपोर्ट में न खड़ा हो। अब वक्त है इनकी साज़िश को बेनकाब करने का।

अलीग साथियों, मैं कल भी स्टूडेंट कॉज़ के लिए खड़ा था, आज भी और कल भी रहूंगा पर मेरी ताक़त आप हैं, अब फैसला आपको करना है कि आप हक़ के साथ हैं या बातिल के, आप democracy के साथ हैं या autocracy के, आप ज़ालिम के साथ हैं या मज़लूम के, आपकी सदा हक़ के लिए उठेगी या बातिल के खौफ से खामोश रहेगी। यकीन जानिए ये साज़िश सिर्फ हमारे खिलाफ नही रची जा रही हैं बल्कि AMU के हर एक तलबा के खिलाफ है, हम तो बस चेहरा बना दिये गए हैं। अगर आज आप खामोश रहे तो कल यही खामोशी आपकी मजबूरी बन जाएगी और फिर शायद बहुत देर हो चुकी होगी।

हम तो मिट जाएंगे अए अर्जे अलीगढ़ लेकिन,
तुमको जिंदा रहना है क़यामत की सहर होने तक

Regards
Huzaifa Aamir Rashadi
Honorary Secretary 
AMU Students Union

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