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Monday, 13 September 2021

आज़मगढ़ के दामन पर लगा वो बदनुमा दाग जिसे आज तक मिटाया न गया !

बटला हाउस फर्जी एनकाउंटर की  !

19 सितंबर 13वी बरसी


आज़मगढ़ के दामन पर लगा वो बदनुमा दाग जिसे आज तक मिटाया न गया !

आज़मगढ़ को आतंकवाद की नर्सरी , आतंकगढ़ का लक़ब दिया गया !

आज़मगढ़, हमे आज भी याद है वो ATS , STF का खौफ जो जब चाहते थे जिसे चाहते थे पकड़ लेते और उसे आतंकवाद के इल्जाम में जोड़ देते।


ऐसे माहौल में सरकार और उसके फर्जी सिस्टम से लड़ने के लिए इसी आज़मगढ़ की कोख से एक मामूली से मदरसे का मौलवी बाहर निकला अपनी क़ौम के नौजवानों की लड़ाई लड़ने उनके ऊपर लग रहे आतंकवाद के इल्जाम को मिटाने के लिए जिसने आज़मगढ़ से लेकर दिल्ली तक कि सड़कों पर एक इंकलाब पैदा किया और दबे कुचले खौफ खाये मुसलमानो को हौसला दिया और उन्हें बताया कि तुम्हे अपनी लड़ाई सड़को पर लड़नी होगी और खुद ही लड़नी होगी अगर तुम नही लड़ोगे तो ये तुम्हारे सेक्युलर फर्जी रहनुमा , तुम्हारे वोटो के ठीकेदार नही लड़ने वाले जिन्हें तुम्हारा सिर्फ वोट चाहिए !



उस शख्श का नाम Maulana Aamir Rashadi Madni  है जिसे आज सियासी तौर पर अपाहिज कर दिया गया , माना कि तुम्हारी नज़रों में उनसे कुछ गलतियां हुई होंगी उनके अंदर कुछ कमियां रही होंगी हर इंसान तो फरिश्ता नही होता न , फिर भी अगर तुम फरिश्ते थे तो उनकी ताकत बनते उन्हें मज़बूत करते पर नही जब वोट देने की बात आयी तो तुमने अपना नेता अलग चुन लिया उनका साथ छोड़ दिया और ये कहते हुए किनारा कर लिया अरे मुसलमान होकर क्या कर लेंगे , भाजपा को सपोर्ट कर देंगे , सपा ,बसपा से सौदा कर लेंगे और जब इलेक्शन खत्म हो जाएगा तो तुम्ही ताने दोगे 2 हजार वोट मिला , 500 वोट मिला पार्टी खत्म हो गयी ये वो दुनिया भर की चीज़ें एक बात और जीतनी मौलाना की उम्र न होगी उससे कही ज़्यादा तुमने उनके ऊपर इल्ज़ामात लगाए उन्हें बदनाम किये होंगे !


खैर वक्त वक्त की बात होती है !

सियासत में उतार चढ़ाव लगे रहते है !


पार्टीया या शख्सियत भले ही खत्म हो जाये पर उनके द्वारा पैदा किये गए इंकलाब कभी खत्म नही होते !


Rashtriya Ulama Council  सिर्फ एक सियासी पार्टी ही नही बल्कि एक इंकलाब है वो इंकलाब जिसे इतिहास के पन्नो में दर्ज कर लिया गया है !



शहबाज़ अहमद !

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