"हर बार देश और उसके लोकतंत्र की रूह सेकुलरिज़्म को मज़बूत करने के लिए अपनी जाने, अपनी नस्लें, अपनी विरासत तक गंवा दी" तलहा रशादी प्रवक्ता राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल
मुल्क में जहां सेकुलरिज़्म अपनी आखरी सांसे गिनता नज़र आ रहा है तो वहीं मुल्क के संविधान पर भी खतरा मंडरा रहा है और आये दिन संविधानिक मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इन हालात में आज एक बार फिर हमारी जिम्मेदारी बनती है कि जिस तरह से देश को आज़ाद कराने में हमने पहल और नेतृत्व किया तो वैसे ही आज के मुश्किल और मायूसी भरे दौर में हम मज़बूती से संविधान की हिफाज़त और इसके अस्तित्व को बचाने वाले बने। आइए आज ConstitutionDay पर देश की संप्रभुता, पंथ निरपेक्षता, समता, अखण्डता, सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और लोकतंत्र को बचाये रखने का अहद करें क्यों ये मुल्क कल भी हमारा था, आज भी और कल भी रहेगा।
इस मुल्क में पिछले 70 सालों से तथा कथित सेकुलर दलों ने सेकुलरिज़्म बचाने के नाम पर हमारा इस्तेमाल किया और हमने हर बार देश और उसके लोकतंत्र की रूह सेकुलरिज़्म को मज़बूत करने के लिए अपनी जाने, अपनी नस्लें, अपनी विरासत तक गंवा दी पर देश के सेकुलरिज़्म को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की पर सेकुलरिज़्म का नारा देने वाले सेकुलर दल खुद अंदर से खोखले और कम्युनल निकले।


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