हाल ही में एक लन्दन से हैकर के ईवीएम को हैक करने के दावे को लेकर सभी राजनितिक दलो ने ईवीएम का विरोध करना शुरू कर दिया है कुछ नेताओ के बयान आना भी शुरू हो गया है
इसी दावे को लेकर अपनी ईवीएम पर अपनी असन्तोष प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उलेमा कौंसिल के युथ विंग के प्रदेशाध्यक्ष श्री नुरुलहुदा अंसारी ने एक ब्यान देते हुये कहा की ईवीएम से चुनाव कराना पूरी तरह से पारदर्शी व् सुरक्षित नही है सभी विपक्षी दलो ने ईवीएम से चुनाव न कराने की अपील कर रहे है तो समझ में नही आ रहा चुनाव आयोग क्यों इतना मनमानी कर रहा है क्यों नही विपक्षी दलो की मांगो को गम्भीरता से लिया जा रहा इससे तो यही स्पष्ट रूप से प्रतीत हो रहा की कहि न कहि दाल में काला जरूर है आखिर कहि न कहि ये लोकतन्त्र का सवाल है और लोकतांत्रिक व्ययस्था से हम कोई समझौता नही कर सकते ये 125 करोड़ देशवासियो का सवाल है अगर विपक्ष ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव की मांग कर रहा है तो इस मांग को भी तो आयोग को मानना चाहिए हमलोग चुनाव आयोग से एक बार फिर अपील करते है अपने ईवीएम के द्वारा चुनाव कराने को लेकर जो निर्णय लिया है उस पर एक बार पुनः उनको इस बाबत सोचना चाहिए अमेरिका जापान चाइना जैसे विकसित और तकनीकी क्षेत्र में झण्डा गाड़ने वाले देश में आज भी बैलेट पेपर से ही चुनाव होता आरहा है कहि भी किसी भी देश ने ईवीएम को पारदर्शी और सुरक्षा की दृष्टि से सही नही माना तमाम ऐसे पूर्व में हुए चुनाव में मशीनों में भारी खराबी व धांधली का आरोप लग चुका है 125 करोड़ देशवासियो के विश्वास का प्रश्न है हम एक स्वतन्त्र और स्वस्थ् लोकतंत्र में विश्वास करते है स्वस्थ लोकतंंत्र में 125 करोड़ लोगो का विश्वास पाना जरूरी है चुनाव बिलकुल ही पारदर्शी एवम् विश्वसनीय होना चाहिए हमे तो ये लगता है की कहि एलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के हैक होने के साथ इलेक्सन कमीशन को भी हैक कर लिया गया है चुनाव की तिथि आयोग से पहले भाजपा के नेताओ को मालुम हो जाता है अध्यक्ष अमित शाह कहते है की पान्च साल नही पच्चास साल सत्ता में रहेंगे ये बिलकुल ही निचले दर्जे के ब्यान है उनको शर्म आना चाहिए की वो एक लोकतांत्रिक देश में एक लोकतात्रिक पार्टी के नेता है किसी लोकतान्त्रिक देश में ऐसा ब्यान शोभा नही देता और हैकर्स के दावो की भी जांच होनी चाहिए अगर हैक होने की बात सच है तो चुनाव आयोग अपना रुख स्पष्ट करे और सत्ता में बैठे लोग अभी कुर्सी छोड़े और देशवासियो से माफ़ी मांगे
इसी दावे को लेकर अपनी ईवीएम पर अपनी असन्तोष प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उलेमा कौंसिल के युथ विंग के प्रदेशाध्यक्ष श्री नुरुलहुदा अंसारी ने एक ब्यान देते हुये कहा की ईवीएम से चुनाव कराना पूरी तरह से पारदर्शी व् सुरक्षित नही है सभी विपक्षी दलो ने ईवीएम से चुनाव न कराने की अपील कर रहे है तो समझ में नही आ रहा चुनाव आयोग क्यों इतना मनमानी कर रहा है क्यों नही विपक्षी दलो की मांगो को गम्भीरता से लिया जा रहा इससे तो यही स्पष्ट रूप से प्रतीत हो रहा की कहि न कहि दाल में काला जरूर है आखिर कहि न कहि ये लोकतन्त्र का सवाल है और लोकतांत्रिक व्ययस्था से हम कोई समझौता नही कर सकते ये 125 करोड़ देशवासियो का सवाल है अगर विपक्ष ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव की मांग कर रहा है तो इस मांग को भी तो आयोग को मानना चाहिए हमलोग चुनाव आयोग से एक बार फिर अपील करते है अपने ईवीएम के द्वारा चुनाव कराने को लेकर जो निर्णय लिया है उस पर एक बार पुनः उनको इस बाबत सोचना चाहिए अमेरिका जापान चाइना जैसे विकसित और तकनीकी क्षेत्र में झण्डा गाड़ने वाले देश में आज भी बैलेट पेपर से ही चुनाव होता आरहा है कहि भी किसी भी देश ने ईवीएम को पारदर्शी और सुरक्षा की दृष्टि से सही नही माना तमाम ऐसे पूर्व में हुए चुनाव में मशीनों में भारी खराबी व धांधली का आरोप लग चुका है 125 करोड़ देशवासियो के विश्वास का प्रश्न है हम एक स्वतन्त्र और स्वस्थ् लोकतंत्र में विश्वास करते है स्वस्थ लोकतंंत्र में 125 करोड़ लोगो का विश्वास पाना जरूरी है चुनाव बिलकुल ही पारदर्शी एवम् विश्वसनीय होना चाहिए हमे तो ये लगता है की कहि एलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के हैक होने के साथ इलेक्सन कमीशन को भी हैक कर लिया गया है चुनाव की तिथि आयोग से पहले भाजपा के नेताओ को मालुम हो जाता है अध्यक्ष अमित शाह कहते है की पान्च साल नही पच्चास साल सत्ता में रहेंगे ये बिलकुल ही निचले दर्जे के ब्यान है उनको शर्म आना चाहिए की वो एक लोकतांत्रिक देश में एक लोकतात्रिक पार्टी के नेता है किसी लोकतान्त्रिक देश में ऐसा ब्यान शोभा नही देता और हैकर्स के दावो की भी जांच होनी चाहिए अगर हैक होने की बात सच है तो चुनाव आयोग अपना रुख स्पष्ट करे और सत्ता में बैठे लोग अभी कुर्सी छोड़े और देशवासियो से माफ़ी मांगे

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