अलीगढ : अल्पसंख्यको को कानूनी अधिकार समानता व वास्तविकता को बढ़ावा देने के गरज से हर वर्ष18 दिसम्बर को दुनिया भर मे 'अल्पसंख्यक अधिकार दिवस" मनाया जाता है चूँकि प्रत्येक देश में विभिन्न भाषाई जातीय सांस्कृतिक और धार्मिक अल्पसंख्यक समूह रहते है तो ये देश का कर्तव्य है की आकार धर्म और आबादी को नजरअंदाज करके अल्पसंख्यक समूहों को सभी सुविधाये और अधिकार प्राप्ति प्रदान की जाए! यही लोकतन्त्र की असल वास्तविकता है
इस मौके पर अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कल्चरल हॉल एम् ए लाइब्रेरी में एक सेमीनार को सम्बोधित करते हुए जुल्म व अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज और जुल्म व अन्याय के खिलाफ पहली कड़ी में लड़ाई लड़ने वाले वक्ता के रूप मेे आमंत्रित किये गए पूर्व छात्र संघ महामन्त्री शि.ने.का. आजमगढ़ श्री नुरुलहुदा जी ने कहा की बढ़ रही अष्हिंषणुता और धार्मिक भेदभाव देश के स्वस्थ लोकतन्त्र के लिये खतरा है स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए अल्पसंख्यक समाज को समाजिक समानता व न्याय जरूरी है भारत का लगभग 25 फीसदी आबादी अल्संख्यक का है क्या इसे किनारे कर देश समृद्ध व विकसित देश बन सकता है रंगनाथ मिश्रा व सच्चर कमेटी के रिपोर्ट में अल्पसंख्यक समाज की स्थिति को दलितों से भी बदतर बताया जाता है इसको लागू कर उनको अलग कोटा बनाकर आरक्षण प्रदान कर समाजिक समानता प्रदान करनी चाहिए आज कुछ तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण की राजनिति करने वाले राजनैतिक दल व सत्ता संरक्षण प्राप्त राजनेता राजनितिक रोटी सेंकने वाले तमाम तरह के प्रोपगण्डे हथिया कर प्रतिदिन विशेष कर अल्पसंख्यक समाज को निशाना बना कर उनके खिलाफ बयांबाजिया देते रहते है तथा असमाजिक तत्वों व साम्प्रादायिक हिंसा को बढ़ावा देने का काम और देश मजबूत नीव को खोखला करने का का कार्य कर रहे है ज़रूरत इस बात की है कि आज की मौजूदा राजनीत में जिस तरह अल्पसंख्यकों के डर दिखा तुष्टीकरण की राजनीति बहुसंख्यको में कई जा रही है इसे समाप्त करने का क़दम उठाया जाए इन पर माननीय सुप्रीम कोर्ट आगे बढ़कर निर्णय ले व ऐसे बयान वीरो को गम्भीरता से ले आज अल्पसंख्यक समाज अपने को असुरक्षित महसुस कर रहा है प्रतिदिन कभी गाय के नाम पर कभी मॅब्लिचिंग के नाम पर अफवाह फैलाकर असमाजिक तत्वों का गिरोह सरेआम सड़को पर क्रूर व नृशंस तरीके अबतक सैकड़ो अल्पसंख्यको व् दलितों की हत्या को अंजाम दे चुका है जो देश के समाजिक ताने बाने को तोड़ने का कार्य करते है इसको रोकने के लिए कड़े से कड़े कानून बना कर असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए
इस देश में एक संविधान एक कानून है तो फिर कश्मीर में पत्थरबाजो को पुरस्कार में गोली और वही बुलन्दशहर में एक कानून के रखवाले की हत्या पथराव व आगजनी करने वाले असमाजिक तत्वो गिरोह के सदस्य को वित्तीय सहायता व संरक्षण देकर क्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है जो एक बहुत बड़ा सवाल है ये जनता के सामने जनता इसका जवाब चाहती है अफराजुल रकबार खान एखलाक जैसे न जाने कितने लोगो को मौत के घाट उतार दिया गया उसपे न कोई मीडिया में बहस होती है नही धर्मनिरपेक्ष व् अल्पसंख्यक समाज का हितैषी होने का दम्भ भरने वाले राजनैतिक दल नही उनके राजनेता एक शब्द भी नही बोले नही कोई आर्थिक सहायता दी गई जबकि सभी अत्यंत आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे आखिर इस देश में दोहरा कानून कबतक चलेगा क्यों सबका साथ सबका विकास का स्वांग रचा जा रहा है आज किसी मंत्री का कुत्ता भैंस गायब हो जाता है तो यही शासन और प्रशासन रात दिन एक करके उसको 24 घण्टा में खोजने का काम करती है लेकिन व्ही शासन व्ही प्रशासन किसी अल्पसंख्यक समाज का बेटा नजीब एक माँ का लाल गायब हो जाता है तो उसको दो साल में भी नही ढूंढ पाती आखिर में क्लोजर रिपोर्ट लगाने का काम करती है ये एक सवाल है अपने आप में आखिर कबतक इस मुल्क में दोहरा कानून चलेगा
आज देश के इतिहास में पहली बार किसी इतिहास में एम् ए करने वाले को रिजर्व बैंक में गवर्नर का पद दिया जाता है
आज इतिहास में पहली बार माननीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाहरी लोगो को हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जिससे न्याय की उम्मीद की टकटकी लगाये जनता का कोर्ट से विश्वास टूटा है
आज देश के उच्च जांच एजेंसी पर घुस और रिश्वत का आरोप लगने का मामला सामने आया है जो जनता का इतने दिनों से बना बनाया विश्वास को गहरा आघात लगा कुछ गलत आर्थिक नीतियों से जहां आम जन व्यापारी परेसान है वही बेरोजगारी भी चरम सीमा पर बढ़ी है आज हमारे देश किसीमाये सुरक्षित नही आये दिन हमारे जवान शहीद हो रहे गरीब तर गरीब होता जा रहा है अमीर और आमिर होता जारहा है किसानो की कर्ज माफ़ी के बजाय उद्योगपतियों का कर्जा माफ़ करने में लगी है मानवधिकार की धज्जिया उड़ाते हुए कश्मीरियो पर जुल्म व अन्याय का पहाड़ तोड़ा जारहा है क्या वो देश के नागरिक नही है क्या उनके जीने का अधिकार छिन लिया गया है ये तय करे सरकार बादमे काफी संख्या में कश्मीर में चल रहे अशांति हिंसा पर श्री नुरुलहुदा जी के नेतृत्व में शान्ति मार्च भी मुंह पर काली पट्टी बाँध कर निकाला गया
प्रमुख वक्ता के रूप में नुरुलहुदा पूर्व महामन्त्री छा.स.शि.का. फातिमा नफीस (नजीब की माँ) फैजुलहसन साहब साहब पूर्व अध्यक्ष स्टूडेंट यूनियन एएमयु फिदौस बरभुइया उसामा हमीद मो सलमान इम्तेयाज अध्यक्ष छा.स.अ.मु.यु. हमजा सोफियांन उपाध्यक्ष छा.स.अ.मु.यु. हुजैफा आमिर महामन्त्री छा.स.अ.मु.यु. सहित गणमान्य लोग काफी संख्या में उपस्थित रहे।
Wednesday, 19 December 2018
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वंचित समाज के आखिरी पायदान तक के लोगो के लिए समानता व न्याय प्राप्ति तक जारी रहेगा संघर्ष : नुरुलहुदा पूर्व महामंत्री शि0ने0का0छा0स0
वंचित समाज के आखिरी पायदान तक के लोगो के लिए समानता व न्याय प्राप्ति तक जारी रहेगा संघर्ष : नुरुलहुदा पूर्व महामंत्री शि0ने0का0छा0स0
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